ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा

नववर्ष तुम्हारा स्वागत है
बीते वर्ष को क्या कहूँ 
बहुत कुछ पाया है उससे 
बहुत यादें जुडी हैं
बहुत कुछ किया है दिल से
वह जा रहा है
बहुत कुछ देकर 
दिल रो रहा है 
उसे जाते देखकर क्या करूँ
जाने वाले को कोई रोक पाया है क्या?
नम आँखों से विदा करती हूं 
यही है ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा 
जानेवाला जा रहा है बहुत कुछ देकर 
आनेवाला खड़ा है सौगात लेकर 
                                                              - विभा प्रसाद 


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