पखेरू का ठौर
आज बरामदे में बैठी हुई मैं उस चिड़िया को गौर से देख रही थी। चुपचाप कई दिनों से वो वहाँ बैठी रहती है। हमलोगों का अनुमान है कि वह या तो अंडा दे चुकी है या अंडे को से रही है।
इससे पहले भी उसी जगह पर इसी प्रजाति की चिड़िया ने अंडे दिए थे और वह गिरकर फूट गए। मेरी बेटी वह दृश्य देखकर काफी व्यथित हुई। उसने मुझसे, अपने पापा से इस घटना पर काफी विचार-विमर्श किया।
हाल में फिर उसी तरह की चिड़िया उसी जगह पर घोंसला बनाने का प्रयास करने लगी। मेरी बेटी ने निश्चय किया कि इस बार कोई ऐसा उपाय करना है ताकि चिड़िया का अंडा बर्बाद न हो। उसने अपने पापा के साथ गहन चिंतन किया और उपाय खोज लिया। सफ़ेद सीमेंट घर में था, उसके विचार से झरोखे से लगी उस जगह (घोंसले की जगह) को बराबर कर के किनारे से थोड़ा उठा दिया जाए ताकि चिड़िया के हड़बड़ाकर उठने पर भी अंडे के गिरने का खतरा न रहे। इस निर्माण के पूर्व ही वहाँ तिनके पड़े हुए थे। निर्माणकर्ताओं ने उस कच्चे माल को धीरे से हटाया और अपनी कारीगरी करने लगे। मैं उस समय एक दर्शक मात्र थी, और मुझे डर लग रहा था कि चिड़िया फिर से उस नीड़ को स्वीकारेगी ? जब निर्माणकार्य पूरा हो गया तब उस नीड़ में प्रयुक्त होने वाले तिनके को यथावत रख दिया गया। मेरी ख़ुशी का पारावार नहीं रहा जब मैंने देखा कि पुनः चिड़िया उस जगह पर आ गयी है। एक पखवारा से अधिक बीत चुका है। वह वहाँ सिमट कर बैठी हुई है। यदा-कदा ही वहाँ से हटती है। उपरवाले से दुआ करती हूँ कि इस बार उसके बच्चे सही-सलामत इस दुनिया में आएं और मेरी बेटी का नन्हा दिल न टूटे।
ईश्वर ने हम मनुष्यों को पृथ्वी पर पशु-पक्षियों के साथ रहने को भेजा। पहले हमारे घरों में उन पक्षियों का बसेरा आराम से हो जाता था, पेड़-पौधों की तंगी भी नहीं रहती थी। अब हमने अपने रहने के लिए अभेद्य किला बना रखा है। रोशनदान तक गायब हैं। पेड़-पौधे की पत्तियाँ झड़कर गंदगी का कारण बनती हैं। ज़मीन का पक्का रहना आवश्यक है क्योंकि कच्ची ज़मीन रहने से घर भी गन्दा होगा। प्रकृति-प्रेमियों से माफ़ी मांगते हुए इन पंक्तियों को लिख रही हूँ। अधिकांश सोच इस तरह का देखते हुए मैं लिखने को विवश हो गयी।
क्या हम थोड़ा सा उन पक्षियों के लिए भी सोचेंगे। सुन्दर घर के साथ एक पेड़ भी लगाएं जो पखेरू का ठौर बन सके। यकीन मानिये आपके बच्चे भी आपके इस निर्णय से अति प्रसन्न होंगे।



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